आग लगाने चिंगारी तैयार है...

राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र के विधायक और प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह मुसिबतों से घिरे हुए हैं। अपने राजनीतिक करियर मे अपनी स्वच्छ छवि के लिए जाने-जाने वाले डॉ. रमन पिछले पखवाड़े से इसे साबित करने जूझ रहे हैं... लगातार दो बार मुख्यमंत्री चुने गए डॉ. रमन के किले में आग लगाने अब चिंगारी तैयार होने लगी है...

राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री सिर्फ शहरी क्षेत्र तक ही सिमट कर रह गये हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में न उनकी चहलकदमी है न कोई संवाद। उनके प्रतिनिधि ही ग्रामीणों की समस्या सुन रहे हैं, सुलझा रहे हैं। मुख्यमंत्री कैम्प का भी हाल बुरा है। जनता क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों से संतुष्ट नहीं है। इसके अलावा विपक्ष कभी अधिकारियों तो कभी भाजपा के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर ऊंगली उठाकर उनकी छवि पर हमला कर रहा है।
भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता भी अब खुद को संगठन का कम राज्य सरकार का हिस्सा ज्यादा मानने लगे हैं। ऐसे में जनता के बीच पार्टी की छवि को नुकसान हो रहा है। जिला मुख्यालय में निवास करने वाले भाजपा के नेताओं के रवैये से पहले ही जनता असंतुष्ट है। डॉ. रमन सिंह के स्थान पर अगर कोई और भाजपा से विधायक का उम्मीदवार होता तो ये सीट कांग्रेस की झोली में होती।
संगठन को संभालने में पार्टी अब नाकाफी ही साबित हो रही है। युवा टीम की निष्क्रियता भी अब सामने आने लगी है। अब तक जो कांग्रेस में हुआ करता था भाजपा में गठित होने लगा है। संगठन के युवा हों या वरिष्ठ नेता सभी वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। यहां त्रिमूर्तियों का वर्चस्व समाप्त हो चुका है। पिछले दिनों भाजपा के ही नेता के प्रभारक्षेत्र की कार्यकर्ताओं की बैठक में जो जूते-चप्पल चले थे, उसे कोई नहीं भूला है। यहां भी असंतुष्टि ही कारण बनी थी।
विजऩ 2013 को लेकर विपक्ष ने जोरदार शुरूआत की है, वहीं भाजपा के संगठन में दिखावे की एकता काम नहीं आ रही है। वर्चस्व को लेकर सभी एक-दूसरे के पीछे तलवार निकाले खड़े हैं।

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